Wednesday, December 20, 2017

क्या पीएम मोदी चैन की नींद सोते होंगे ?

आपकी आस्थाओं को धूमिल करता हुआ मेरा ये सवाल न जाने कितने लोगों को परेशान करेगा और लोग मेरे बारे में न जाने क्या क्या कहेंगे फिर भी ये बातें में कहने की हिम्मत जुटा रहा हूं..कि क्या पीएम मोदी चैन की नींद सोते होंगे ? बतौर पीएम नरेंद्र मोदी के पास तो काम का भंडार रहता है ऐसे में पीएम मोदी जिस तरह चुनावी रैलियों के लिए वक्त निकालते है वो तो प्रशंसा के लायक है लेकिन बतौर पीएम मोदी जो बाते कहते है क्या उन बातों में वजन नहीं होना चाहिए. जाहिर है हम अपने प्रधानमंत्री से सच बोले जाने की उम्मीद तो कर ही सकते है. पीएम ने हाल के दिनों में जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों को लेकर टीका टिप्पणी की है वो कई सवाल खड़े करती है. क्या पीएम मोदी जो कह रहे है उसपर पूरी तरह यकीन किया जा सकता है या फिर पीएम महज अपने और पार्टी के फायदे के हिसाब से तथ्यों को सामने रख रहे है जैसा कि होता रहा है. पीएम ने कहा कि राहुल गांधी के नाना यानि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने सोमनाथ मंदिर बनाने से रोका था, जिसके बाद लोगों को ये लगा कि पंडित नेहरु तो हिंदु विरोधी है. जबकि इसकी पूरी सच्चाई देखी जाए तो इसके लिए महात्मा गांधी ने पंडित नेहरु को रोकते हुए ये कहा था कि जिस देश में पंथनिरपेक्ष और धर्मनिरपेक्ष होने की बात कहीं जाती है वहा एक सरकार का एक धर्म के लिए मंदिर बनवाना कितना उचित है ?  सोमनाथ मंदिर का निर्माण तो समाज से चंदा लेकर करना चाहिए. जाहिर है उस वक्त देश के भीतर ऐसे हालात नहीं थे की सरकार मंदिर और मस्जिद के लिए खर्च वहन करें. नेहरु ने इसी तरह सोमनाथ के उद्घाटन के वक्त राष्ट्रपति को जाने से रोका था. हालांकि आज के वक्त से पंडित नेहरु के फैसले को गलत कोई भी कह देगा लेकिन उस वक्त ये फैसला तो समाज हित के लिए ही लिया जा रहा था. जाहिर है पंडित नेहरु प्रधानमंत्री पहले है हिंदु बाद में तो ऐसे में देश हित के फैसले की प्राथमिकता को लेकर इतिहास उन्हे उदारता से देखता है. वही पीएम मोदी ने एक रैली में इंदिरा गांधी को लेकर मोरबी आने पर टिप्पणी करते हुए कहा की जब वो आई थी तो नाक पर रुमाल रखा हुआ था. उन्हे इंसानों से दुर्गंध आता था. 1 अगस्त, 1979 को मोरबी स्थित मच्छू बांध टूट गया था. बताया जाता है कि कुछ ही मिनटों में पूरा शहर पानी में डूब गया था. एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए. संपत्तियों का भारी नुक़सान हुआ. जानवरों की भी बड़ी संख्या में मौत हुई थी. गुजरात और मोरबी के लिए यह भारी संकट का समय था. 16 अगस्त, 1979 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मोरबी आई थीं. उनके इस दौरे की एक तस्वीर चित्रलेखा नाम की गुजराती पत्रिका के 27 अगस्त, 1979 के अंक के कवर पेज पर छपी थी. पेज पर दो तस्वीरें थीं. ऊपर की तस्वीर में इंदिरा गांधी थीं और नीचे की तस्वीर में एक रेहड़ी पर रखे शव के साथ कुछ लोग दिखाए गए थे जो संघ के ही थे. लेकिन पीएम ने सिर्फ इंदिरा गांधी का ही जिक्र किया.  


कोई अनोखी बात भी नहीं है क्योंकि जिस तरह के हालात वहां थे उनमें दुर्गंध के साथ-साथ महामारियां फैलने का भी ख़तरा था. ऐसे में नाक पर कपड़ा रखने की वजह बहुत स्पष्ट और नाक़ाबिल-ए-ऐतराज़ दिखती है.यहां भी पीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री को लेकर एक हिस्से की बात रखी. अब एक और पूर्व पीएम की बात. प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व पीएम पर पाकिस्तान के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया. गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस लीडर मणिशंकर अय्यर के घर डिनर मीटिंग में पाकिस्तान के उच्चायुक्त और पूर्व विदेश मंत्री शामिल हुए थे। इस दौरान पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, पूर्व वाइस प्रेजिडेंट हामिद अंसारी समेत कई नेता और पूर्व राजनयिक शामिल हुए थे। इस पर पीएम मोदी ने इन नेताओं पर पाक संग मिलकर गुजरात चुनावों को लेकर साजिश रचने का आरोप लगाया था। जबकि सच्चाई ये है कि ये मीटिंग भारत पाकिस्तान के सबंधो को लेकर हुई थी. जाहिर है आपके मन में सवाल होगा की इसमें कोई मौजूदा मंत्री या अधिकारी क्यों नहीं शामिल हुआ. तो ये कथा भी सुन लिजिए... पूर्व किस्म के जितने भी लोग होते है, जो एक जिम्मेदार पद संभाल चुके होते है उनको लेकर आए दिन रिसर्च फाउंडेशन मीटिंगो का आयोजन कराते रहते है. ओवरसीज रिसर्च फाउंडेशन नाम की एक संस्था है, रिलायंस की संस्था है, जो ऐसे डेलिगेशन मीटिंग करवाती है . पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी को भी भारत ये संस्था आए दिन बुलाती रहती है. अंग्रेजी के अखबार दि ट्रिब्यून में अय्यर के घर के डिनर में गए भारत के एक पूर्व राजदूत एमके भद्राकुमार की रिपोर्ट छापी है। इनके अनुसार मणिशंकर ने कैंब्रिज के दिनों के अपने दोस्त पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी के सम्मान में डिनर दिया था। भारत के रिटायर पूर्व कूटनीतिज्ञों, सेनाधिकारियों, अफसरों के साथ पूर्व प्रधानमंत्री डा मनमोहनसिंह आमंत्रित थे। सभी के बीच चर्चा का अकेला विषय भारत-पाकिस्तान रिश्तों का था या छुट्टी कहां बिताए और अगली किताब में क्या कुछ हो, ऐसी बातों पर गपशप थी। डा मनमोहनसिंह बोले नहीं, वे मौन सबकों सुनते रहे। चलिए एक वक्त के लिए इस रिपोर्ट को खारिज कर दिजिए. ये बताईये की ये पाकिस्तान के लोगों को वीजा किसने दिय़ा. जो ओवरसीज रिसर्च फाउंडेशन अंबानी की है उसे 35 फीसदी ग्रांट प्राप्त होता है. इसमें भारी भरकम पैसा भारत सरकार भी देती है. तो क्या अंबानी की संस्था पर मोदी सरकार को केस नहीं करना चाहिए. क्या गद्दारों को बुलाने के लिए भारत सरकार पैसे लुटा रही है ? अगर पीएम मोदी के पास ये रिपोर्ट पहले थी तो क्या वो गुजरात चुनाव का इंतजार कर रहे थे? बहरहाल कहने का मूल मतलब तो यहीं है कि पीएम मोदी को इतिहास कैसे याद रखेगा , क्या वो इस बात को लेकर सोचते होंगे , क्योंकि इतिहास जब भी लिखा जाता है परख कर और सत्य के दोनों पक्षों को रखा जाता है, ऐसे में क्या इस बात को पीएम सोचते होंगे की इतिहास ये कहेगा की एक पीएम अपने ही पद पर बैठे पूराने लोगों को लेकर गलत चरित्र चित्रण करते थे. क्या पीएम मोदी ये सब जब सोचते होंगे तो चैन से सोते होंगे ? मेरी चिंता बस इतनी ही है कि इतिहास में एक व्यक्ति की समीक्षा जब बतौर पीएम होगी तो उसके पद की गरिमा की चिंता की जाएगी या नहीं और इतिहास अगर तथ्यपरक लिखा गया तो मोदी को इतिहास में आधा सच बोलने वाले पीएम के रुप में रेखांकित किया जाएगा, क्या ये बात पीएम मोदी को परेशान नहीं करती होगी ?