Thursday, February 1, 2018

बजट ने तो राष्ट्रवादियों की पोल खोल दी !


बजट आ रहा है, आ रहा है, आ रहा है और बजट आ गया , उम्मीदों के बादल पर नाउम्मीदी की आंधी ऐसी हावी हुई की सारी की सारी चीजें धरी की धरी रह गई... बहरहाल बजट को सरकार ने ऐतिहासिक करार दिया है, लेकिन मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट में मिडिल क्लास को बड़ा झटका मिला है. इस बजट से आम लोगों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन कोई राहत नहीं मिली है. किसानों और गरीबों  के लिए कई सारे लुभावने वादें किए गए हैं लेकिन मध्यमवर्ग...खासकर नौकरीपेशा के लिए कुछ भी नहीं है..

स्वास्थ्य बीमा में बड़ा खेल  
बजट में सबसे बड़ा ऐलान 10 करोड़ से अधिक गरीब और कमजोर परिवारों को लाभ पहुंचाने को लेकर किया गया है . सरकार अब 50 करोड़ लोगों के इलाज पर पांच लाख तक का खर्च उठाएगी . इसका मतलब है कि सरकार देश की करीब आधी आबादी का पांच लाख तक का मेडिकल खर्च खुद वहन करेगी .लेकिन ये कब तक होगा कोई ठोस जवाब नहीं है, कांग्रेस का कहना है कि ये पुराने ही वादों की नई पैकिंग है...
 पेट्रोल-डीजल का बड़ा खेल
वहीं इस बजट में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती पर बड़ा खेल खेला है. बजट में पेट्रोल और डीज़ल पर 8 रुपए का नया 'रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस' लगाया गया है और 6 रुपए का पुराना 'रोड सेस' खत्म किया गया है. यानी पेट्रोल और डीज़ल पर दो रुपए सेस बढ़ गया और पेट्रोल और डीज़ल पर बेसिक एक्साइज़ ड्यूटी 2 रुपए घटा दी गई. इसलिए दो रुपए सेस बढ़ने और 2 रुपए एक्साइज़ ड्यूटी घटने से पेट्रोल की कीमत में बदलाव शून्य हो गया है.
मिडिल क्लास को ठेंगा
इस बजट में मिडिल क्लास को कोई खास राहत नहीं मिली. ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव हो सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ . सरकार ने इस बजट में इनकम टैक्स स्लैब नहीं बदला है. जहां एक हाथ से सरकार ने 40 हजार रुपये तक का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया है तो साथ ही दूसरे हाथ से ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल रिइंबर्समेंट को छीन लिया है .बजट में शेयर बाजार पर भी टैक्स की मार पड़ी है. एक लाख रुपये तक इक्विटी से कमाई पर आपको 10 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स  लगाया गया है. इसके तहत अगर अगर 1 साल के बाद शेयरों को बेचा जाता है तो 1 लाख रुपये तक की इनकम पर आपको टैक्स देना होगा. अभी एक साल से कम समय में शेयर बेचने पर 15 फीसदी का अल्पकालिक पूंजी लाभ कर देना होता है. इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. इस नए कर से सरकार को 36,000 करोड़ रुपये की आय होगी.

विदेशी माल मंहगा
सरकार ने विदेश से आने वाले सभी सामानों पर कस्टम ड्यूटी बढ़ा दी है जिसका सीधा असर ये हुआ है कि मोबाइल, टीवी, सिगरेट, ज्वैलरी, फुटवियर, गाड़ियां, खिलौने, मेकअप, डियोड्रेंट्स, परफ्यूम सहित एलसीडी, एलईडी, ओएलईडी टीवी भी महंगा हो गया है.
रक्षा की क्षेत्र में उदास सरकार
वहीं जो बड़ा झटका हमें देखने को मिला है, वो ये है कि जो सरकार चीन और पाकिस्तान के आंख में आख डाल करने का दावा किया उसी सरकार ने रक्षा बजट में खासी दिलचस्पी नहीं दिखाई है... रक्षा क्षेत्र को मामूली बढ़त दी गई. सरकार ने 2018-19 के लिये रक्षा बजट 7.81 प्रतिशत बढ़ाकर 2.95 लाख करोड़ रुपये किया है, जो चालू वित्तीय वर्ष में 2.67 लाख करोड़ रुपये था. ये रक्षा बजट 2018-19 की अनुमानित जीडीपी का महज 1.58 प्रतिशत है, जो 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के दौरान के बजट से भी कम है. रक्षा मुद्दों के जानकारों की मानें तो देश की अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ रक्षा बजट बेहद धीमी गति से बढ़ा है. वर्तमान अर्थव्यवस्था के हिसाब से रक्षा बजट 2.5% से ज्यादा होना चाहिए. जो केवल 1.58 प्रतिशत है.
नौकरी में खेला
सरकार ने इस बजट में 70 लाख नौकरियां पैदा करने की बात कही है लेकिन ये नहीं बताय़ा है कि ये नौकरी उन 2 करोड़ नौकरियों में शामिल  होगी या नहीं जो बीजेपी ने अपने मेनिफेस्टों में कहा था...यानि 2 करोड़ हर साल नौकरी का वादा 70 लाख पर आ गया.
किसानों के साथ चुनावी स्टंट
 चुनावी साल में मोदी सरकार ने सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना बढ़ाने का एलान किया. सरकार ने देश के किसानों को भरोसा दिया है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी.हालांकि ये अलग बात है कि राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल और सांसद तक की तनख्वाह में अप्रताशित तरीके से बढाने का ऐलान किया गया है.. अब बजट का झूनझूना बजाना हो तो बजाइये वरणा हिन्दू मुस्लमान के मुद्दे पर देश भर में आग लगाईये... नमस्ते....