तकरीबन 25 हजार लोग रामलीला मैदान में प्रधानमन्त्री की बात सुनने के लिए मौजूद थे । जिसमे ज्यादातर लोग बसों में बैठा कर लाये गये थे । दिल्ली के सांसदों से लेकर बीजेपी के अध्यक्ष को सुनने के लिए जनता आतूर नहीं दिखी । वो सभी केवल और केवल मोदी को सुनने के लिए ही आये थे जो उन्होंने बार बार महसूस भी कराया । अब जब जनता किसी और की बात नहीं सुनना चाहती तो मै भी क्या और क्यों लिखू उनके बारे में ? वैसे एक बार जिक्र मनोज तिवारी की बनती है जिन्होंने केजरीवाल को साफ़ कहा कि ऑटो के पीछे अपने फोटो के साथ मेरी फोटो लगवाइए तब आपको टक्कर का अंदाजा होगा । वैसे उन्होंने बड़े प्यार से इन बातो के जरिये जगदीश मुखी को नकारते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दी दिल्ली के मुख्यमंत्री के लिए ,भाई वाह मान गये मनोज भाई राजनीति आप भी सीख गये । खैर अब बात मोदी की करते है जिन्होंने आज कुल 38 मिनट का भाषण दिया । मोदी आज कुछ अलग ही मुड में थे अपने भाषण के अंत में भारत माता की जयकार लगाना भूल गये ,भाई हो सकता है प्रतिद्वंदी इतना मजबूत है दिल्ली में कि हालत खराब होना तो लाजमी है । खैर वही सपनो का पिटारा खोलते मोदी ने अनर्गल सपनो का सौदा करना पसंद किया । लच्छेदार भाषण में बिजली और झुग्गी झोपडी मुद्दा रहा । 2022 तक सबको घर देने की बात कहते हुए मोदी ने बिजली पर किये वादों को भुला दिया । 30 प्रतिशत दाम कम करने की बात बीते दिनों की हो गयी है जो अब अप्रंगिक दिखता है । बड़ी बात ये रही की दिल्ली में भ्रष्टाचार का जिक्र नही हुआ अगर होता तो मोदी जी को केजरीवाल mcd में हो रहे पैसे के खेल से सामना करवा देते जो बीजेपी के लिए अपाच्य साबित होती । मोदी ने कहा की हम झूट की फेक्ट्री चलाने वालो के बारे में जिक्र नही करना चाहते और उन्होंने बिना नाम लिए ही आम आदमी पार्टी पर अपने भाषण का 13 मिनट बर्बाद कर दिया । भागने वालो को सजा देने की बात कही, अराजकता फ़ैलाने वालो को नक्सलियों से मिल जाने को कहा । धरना मास्टर से लेकर हार का मज़ा चखाने की बात मोदी जी ने जनता से कर दी ,वही बीजेपी जो सबसे बड़ा भूल कर रही है वो ये कि जो गलती आप ने लोकसभा में बिना एजेंडा के चुनाव लड़ने की चालकी दिखाई थी और केवल विरोध की राजनीति कर के चुनाव जितने कि कोशिश की थी अब वही काम दिल्ली में बीजेपी करना चाहती है ,नतीजा आपके सामने है ।
आज के वक़्त को देखते हुए ये तो कहा जा सकता है ,
हाथी, घोडा और पालकी ,
जय हो मोदी सरकार आपकी ।
ं
दिल कि लिखें तो कहां लिखें ...यहां लिखें कि वहां लिखें ..हमारी कलम में अगर हो स्याही किसी और की, तो फिर लिखें तो क्या लिखें।
Saturday, January 10, 2015
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