Friday, July 17, 2015

डिजीटल हो जाने पर सवालों का सायां






प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंदिरा गांधी इन्डॉर स्टेडियम में  डिजीटल इंडिया मिशन लॉन्च कर दिया। डिजीटल इंडिया का अर्थ है पूरे भारत को इंटरनेट से जोड़ देना, अधिकतम काम को ऑन लाइन कर देना तथा प्रत्येक व्यक्ति तक ऑन लाईन सेवा की पहुंच। 125 करोड़ देश में यह अंग्रेजी में जिसे हर्क्युलियन टास्क कहते हैं वही होगा।
प्रधानमंत्री के चुनावी वायदों में यह शामिल था। अपने एक वर्ष के कार्यकाल में वे कई बार अपने डिजीटल इंडिया सपने पर जो बातें करते रहे हैं उनसे कई बातें स्पष्ट होतीं हैं। मसलन, वे चाहते हैं कि भारत का कोई भी गांव ऐसा न रहे जहां की इंटरनेट की पहुंच न हो और आवश्यक ऑन लाईन सेवा वहां उपलब्ध न हो। गांव के किसान भी अपना सामान बेचने के लिए ऑन लाइन कृषि बाजार पर मूल्य देखें, अपने सामानों की उपलब्धता बताएं और खरीदार आकर उनका सामान खरीदकर ले जाएं। निश्चय ही यह सुनने में सपना ही लगता है। ऐसा लगता है जैसे यह हकीकत नहीं, सोते समय आने वाला सुनहरा ख्वाब हो।
प्रधानमंत्री  मोदी के डिजीटल इंडिया के नौ मुख्य बिंदु है दृ
1. ब्रॉडबैंड हाइवे - सड़क हाइवे की तर्ज पर ब्रॉडबैंड हाइवे से शहरों को जोड़ा जाएगा.
2. सभी नागरिकों की टेलीफोन सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित की जाएगी.

3. सार्वजनिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम जिसके तहत इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी.
4. ई-गवर्नेंस - इसके अंतर्गत तकनीक के माध्यम से शासन प्रशासन में सुधार लाया जाएगा.
5. ई-क्रांति - इसके तहत विभिन्न सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में लोगों को मुहैया कराया जाएगा.
6. इंफोर्मेशन फॉर ऑल यानी सभी को जानकारियाँ मुहैया कराई जाएंगी.
7. इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन - सरकार का लक्ष्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए कल-पुर्जों के आयात को शून्य करना है.
8. आईटी फॉर जॉब्स यानी सूचना प्राद्योगिकी के जरिए अधिक नौकरियां पैदा की जाएंगी.
9. अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम - इसका संबंध स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की हाजिरी से है.

इस ख्वाब को हकीकत में बदलने के लिए  मिशन मोड में काम करना होगा। गांव-गांव, कस्बे-कस्बे नेट पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर आधारभूत ढांचे का निर्माण करना होगा।  पूरे देश में केबल बिछाना होगा। पहाड़ों, नदियों, जंगलों से होकर दूरस्थ गांवों तक केबल ले जाना कितना कठिन काम है इसका अनुमान स्वयं लगाइए।
डिजीटल इंडिया में ऑन लाइन बुक  पढ़ने और ऑन लाइन लौकर जैसी सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। यानी आपने कोई पुस्तक जहां तक पढ़ी वहीं उसको लौक कर दीजिए और अगली बार वहां से फिर आपको उपलब्ध होगा। आपने कोई औनलाइन नोट बनाया तो वह भी लौक हो जाएगा। आप अपने जरूरी डाक्यूमेंट भी ऑन लाईन रख सकते हैं। ऑन लाईन अस्पताल का भी सपना है। तो अभी यह सब ख्वाब ही लगता है।क्योंकी बीते दिनों ही राजस्थान सरकार के वेबसाइट को हैक कर लिया गया था जिसके बाद अब सवाल यह उठ रहा हैं कि डिजीटल इंडिया के तहत तैयार होने वाले ई-लौकर कितने सुरक्षित होंगे ?  हमारे रखे गये डाटा को कोई चुरा कर गलत इस्तमाल तो नहीं करेगा ?  डाटा को सुरक्षित रखने और हैकिंग जैसी विसाल समस्या से निपटने के लिए सरकार क्या करेगी ?
इस ख्वाब को हकीकत में बदलने के लिए एकदम मिशन मोड में काम करना होगा। गांव-गांव, कस्बे-कस्बे नेट पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर आधारभूत ढांचे का निर्माण करना होगा। इसमें भारी खर्च की आवश्यकता है। इस समय डिजीटल फाइबर केबल ही पूरे देश में नहीं है। पूरे देश में केबल बिछाना होगा। पहाड़ों, नदियों, जंगलों से होकर दूरस्थ गांवों तक केबल ले जाना कितना कठिन काम है इसका अनुमान स्वयं लगाइए। इसी तरह इसके अन्य उपादान हैं। जगह-जगह एक्सचेंज की आवश्यकता होगी। अनुमान है कि इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र काफी निवेश करेंगे।
करीब 400 के आसपास कॉरपोरेट्स ने इस कार्यक्रम में उपस्थित दर्ज की। देखना होगा वे निवेश की कितनी घोषणाएं करते हैं। बगैर निजी क्षेत्र के यह संभव हो ही नहीं सकता। निजी क्षेत्र अगर आएंगी तो फिर सेवा भी वैसी सस्ती नहीं हो सकती जितनी आम आदमी को इस सेवा के उपयोग के लिए चाहिए। हमारे देश में स्पेक्ट्रम काफी महंगे हैं। वे कैसे सस्ती होंगी? इंटरनेट को निजी कंपनियों ने अभी काफी महंगा कर रखा है और जितनी स्पीड बताते हैं उसकी आधी भी नही देते। यह स्थिति दिल्ली, मुंबई जैसे मेट्रों शहरों की हैं। गांवों तक उनकी स्पीड की क्या दशा होगी? कैसे स्पीड बढ़ाई जाएगी?
आप अगर सेवा दे भी दें तो उसका उपयोग करने का ज्ञान भी तो लोगों को चाहिए। इसलिए इंटरनेट साक्षरता के विस्तार की बात है। इसे कैसे पूरा किया जाएगा? क्या साक्षरता कार्यक्रम के साथ इंटरनेट साक्षरता को भी समाहित किया जा सकता है?
तो हम तैयार रहें। डिजीटल इंडिया के रुप मे भारत के सम्पूर्ण रुपांतरण के महाअभियान की शुरुआत के लिए। उसमें अपनी भूमिका और योगदान की भी हमें तैयारी करनी चाहिए।