दिल कि लिखें तो कहां लिखें ...यहां लिखें कि वहां लिखें ..हमारी कलम में अगर हो स्याही किसी और की, तो फिर लिखें तो क्या लिखें।
Tuesday, August 15, 2017
गोरखपुर हादसे ने योगी की नीयत को एक्सपोज़ किया है ?
Tuesday, July 11, 2017
भ्रष्टाचार का ‘सैंपल’ लालू ही क्यों ?
Monday, July 3, 2017
जब जिंदगी ने यू टर्न ले ली......
वो शाम कुछ अजीब सी थी, दिल को लग रहा था कि कुछ तो अलग है लेकिन क्या ये जानने के लिए दिल बेचैन था, खिड़कियों से कभी झांकते तो कभी बालकनी में आना जाना कर रह था, मन नही लगा तो नीचे मार्केट में चला गया, सिगरेट की डिब्बी ली और चल पड़ा, कुछ समझ नही आ रहा था तो सोचा कि कुछ दूर पैदल चल लू, कुछ दूर ही आगे गया था, की सिगरेट जलाने की तलब हुई, सिगरेट जलाने ही वाला था की एक आवाज आई, कि रोहन तुम और सिगरेट , ये कब से शुरू किया तुमने, उसकी आवाज से ही मुझे इल्म हो गया था कि ये गुंजन है , जिसने इतने अधिकार से मुझसे सवाल किया था, वो मुझसे कुछ पूछती इससे पहले मैंने बोला, अरे तुम किसी हो, यहाँ अचानक, सब ठीक तो है, वो मेरे सवालों का जवाब देती उससे पहले ही मेरी नजर उसके चेहरे पर गई, न मांग में सिंदूर था, न गले मे मंगल सूत्र, मैंने फिर सवाल किया ये क्या हाल बना रखा है तुमने, क्या हुआ ? मेरे सवालों को दोहराते हुए गुंजन ने बोला अरे बाबा वही तो पूछ रही हूँ, कि ये क्या हाल बना रखा है ? मैंने कहा ये सब तो ऐसे ही है ये छोड़ो तुम बताओ की माथे पर से सिंदूर गायब, न गले मे मंगलसूत्र आखिर हुआ क्या ? मायूसी भरे चेहरे के साथ वो बोली अब हम और सौरभ साथ नही है, मैन पूछा कि क्यों क्या हो गया ? वो बोली लम्बी कहानी है कभी और, फिलहाल मुझे देर हो रही है मैं बाद में मिलती हूँ, मैं कुछ और पूछता उससे पहले गुंजन bye बोल कर जा चुकी थी, मैं वही से उल्टे पाव रूम पे वापस चला आया, न खाना खाया न पानी पिया, गहराती रात के साथ रफी और किशोर के नगमे मुझे बार बार गुंजन के बारे में सोचने पर मजबूर कर रहे थे । सिगरेट होटो पर लगा तो रहा था लेकिन जलाने की हिम्मत नही हो रही थी न जाने गुंजन की बातें कानो में गूंजे जा रही थी, जैसे तैसे रात तो बीत गयी, सुबह से ही बाजार के चक्कर काटने शुरू कर दिए इस ख्याल से क्या पता गुंजन से मुलाकात हो जाये लेकिन 3 दिन इंतज़ार में ही कटे । चौथे दिन एक unkonw नंबर से फोन आया , हाँ हेलो कौन , हा रोहन मैं गुंजन ,कहा हो तुम , क्या तुम मिल सकते हो अभी, मैने बिना किसी देर के कहा हा बोलो कहा आना है , उसने कहा कि यहा नही citiiwalk में मिलते है मैंने झट से हा कहा और 4 बजे का वक़्त तय हुआ । मारे खुशी के तो जैसे मेरा ठिकाना ही न रहा, मैं वक़्त से पहले पहुँच कर इंतज़ार करने लगा, 4 बजकर 10 मिनट हो चुके थे, गुंजन को मेरी नजरे बेसब्री से तलाश रही थी वक़्त 4 बजकर 30 मिनट हो चुका था लेकिन वो अब भी नही आई, मैन सोचा कि उसे फोन करू, फिर नही किया, 5बज ने को हुआ तो मैंने सोचा अब तो फोन कर लेना चाहिए लेकिन तभी आवाज आई सॉरी , वो क्या है न बाल कोंब नही हो पा रहे थे, मैन मुस्कुरा कर बोला कोई बात नही, फिर गुंजन ने अपने मिलने का कारण बताया, दरअसल गुंजन अपने डिवोर्स को लेकर परेशान थी और बीते 3 दिन से वो इसी सिलसिले से यूपी के सहारनपुर में थी । अपने बीते 5 साल की पूरी दास्तान सुनाई, इसी बीच हमने हल्दीराम की राज कचौरी खाई और बीकानेर के मसाले डोसे हम दोनों बातों में इतने मसगुल थे कि वक़्त का पता ही नही चला कि कब 9 बज गए, अपनी आप बीती सुनाते कभी गुंजन की आंखे नम होती तो कभी मेरे जवाब पर वो मुस्कुरा देती , फिर रात में मैं और गुंजन साथ ही वहाँ से निकले, चूंकि रात हो गयी थी तो मैंने गुंजन को ऑटो से उसके घर तक छोड़ दिया , फिर पूरी रात गुंजन की बातों को सोच कर बीत गयी ।कैसे उसके पति ने उसे यातनाएं दी कैसे वो अपने जिंदगी के 5 सबसे बुरे साल बिता कर आई थी , यही सब सोचते सोचते न जाने कब सुबह हो गयी । मै आफिस के लिए तैयार ही हो रहा था तभी गुंजन का फोन आया कि यार क्या तुम मेरे लायक कोई नौकरी ढूंढ सकते हो ? मैन बिना कुछ सोचे हा बोल दिया और बोला कि एक cv तुम मुझे भेज दो । फिर मैं देखता हूँ । देर शाम गुंजन ने अपना cv भेज दिया था, मैं उसकी cv को एडिट कर रहा था तभी मेरे दोस्त अभिनव का फोन आया कि यार कोई अकाउंटेंट हो तो बता दे, उसके कंपनी को जरूरत है मैंने कहा कि कल तक का वक़्त दे बताता हूँ, । कल सुबह मैन अभिनव से मिलने का वक़्त मांग लिया फिर मैं अभिनव के दफ्तर गया और उसे एक cv दी, cv देखते ही अभिनव ने कहा कि तू होश में तो है, तुझे ये कहा से मिली, फिर मैंने अभिनव को सारी कहानी बताई , अभिनव ने मेरी बातों को सुन कर कहा कि यार क्या बुरी किस्मत है उसकी, तेरे जैसे बतमीज़ से दूर हुई तो बेचारी के किस्मत में सनकी आ गया , खैर तू कॉफी पी मैं कोशिश करता हूँ । अभिनव ने जिस बतमीज़ की बात की वो दरअसल बीते सालों में वो मेरे ऊपर पूरी तरह से हावी था, अपनी बात मैं सबसे मनवता तो था साथ ही सबसे बतमीजी से बात भी करता था, यही कारण था कि धीरे धीरे गुंजन मुझसे दूर हो गयी थी ।लेकिन वक़्त बदला और गुजन के जाने के बाद मैं भी .... वक़्त बीतता गया और बीतते वक़्त के साथ गुंजन और मेरी बात फिर ज्यादा ज्यादा देर के लिए होने लगी । गुंजन को अभिनव की कंपनी में नौकरी भी मिल गयी थी । 6 महीने कब बीत गए पता ही नही चला, पहले तो एक दिन भी काटना मुश्किल था ।एक दिन अचानक गुजन का फोन आया कि कहा हो तुम अभी मिलो मुझसे , मैन बोला बताओ कहा आना है उसने बोला तुम कहा हो , मैं तो अपने कमरे में हूँ, kk आती हूँ । थोड़ी देर में गुजन मेरे घर पर थी , वो दरवाजे पर ही थी तभी मैने बोला कि ये मायूसी क्या बात है बताओ , गुजन के जुबां से शब्द बाहर नही आये थे लेकिन उसकी आंखों की मोतियों ने बात बता दी , मैं उसे चुप करवा ही रहा था की वो सिसकते हुए बोली आज कोर्ट ने हमारे डिवोर्स पर मुहर लगा दिया है , और आज ही पिताजी मुझसे कोई मिश्रा जी के बेटे के बारे में सोचने को कह रहे है , मैन तो साफ साफ बोल दिया कि भाई मेरे बस की नही ये शादी वादी, मुझे नही करना ।दोबारा गुजन की शादी के नाम से जो मेरे अंदर डर अभी जन्म ले रहा था वो गुजन की आखरी बातों को सुन कर खत्म हो गया । थोड़ी देर की चुप्पी के बाद गुजन ने मुझसे पूछा कि तुमने अभी तक शादी क्यों नही की , मेरे दिल ने कहा कि कैसे करता तुम जो चली गयी थी मुझसे दूर ,,, लेकिन जज्बातों को संभालते हुए मैने कहा कि जो गलतियां कि मैंने कम से कम इस जन्म तो उसका पश्चाताप कर लेने दो , मेरी बातों को गौर से सुन रही गुजन बोली अरे ऐसे कौन करता है , वो मुझसे कुछ और पूछती उससे पहले मैने कहा कि जानती नही हो मुझे मैं तो जो चाहता हूँ वही करता हूँ ,, इस बात को बोलने के बाद मैं कॉफी बनाने चला गया और गुजन पीछे से मुझे शादी करने के 50 फायदे गिनवाती रही ......
Friday, June 16, 2017
मोदी जी! कतरास और मेरी पहचान मिटाने का दोषी कौन ?
देश की सत्ता जहाँ से चलती है वहाँ से 1280 किलोमीटर दूर मेरी एक पहचान मिट गई । अब मैं उसके बारे में सिर्फ यादों के हिसाब से बात कर पाऊंगा । कभी वहाँ जाकर उसका प्रत्यक्षदर्शी नही बन पाऊंगा । पीएमओ और रेल विभाग ने झारखंड के जिला धनबाद के अंतर्गत आने वाले कतरास गढ़ और चंद्रपुरा रेल लाइन को बंद कर दिया है । तकरीबन 32 किलोमीटर की रेल लाइन बन्द हो गयी । सरकार कह रही है कि रेल की पटरियों के नीचे आग का दरिया बह रहा है जो कभी भी ट्रेन में सफर करने वाले हज़ारों लोगो को अपने अंदर ले सकता है । तो जाहिर है कि सरकार ने जनहित में ये फैसला ले लिया । आप लोग मेरे यादों से बहुत दूर है तो सबसे पहले आपका और मेरी यादों का परिचय होना जरूरी है । मैं वही कतरास और चंद्रपुरा के बीच रहता था । मंडल केंदुआडीह के पास एक रेलवे हाल्ट है बुदौढा । हम ,पापा और मेरे बड़े भाई अक्सर शनिवार को यहाँ से ट्रेन पकड़ के कतरास जाया करते थे और ये लगभग हर हफ्ते होता था । पापा घर के लिए समान खरीदने जाते और हम और भैया मीठा खोआ वाला समोसा खाने । कतरास हमारे इलाके का आज भी सबसे बड़ा बाजार है धनबाद और झरिया के बाद । कतरास का दुर्गा पूजा तो आस पास के जिलों तक प्रचलित है । दुर्गा पूजा में यहाँ मेला घूमने करोड़ों लोग आते है । भीड़ इतनी की पैर नही रख सकते । हम भी जाते थे । पाप लेकर जाते थे उसी बुदौढा स्टेशन से कतरास तक । कतरास में मेला लगता था,मौत का कुआं,ब्रेक डांस,तारा माची । ट्रेन में इतनी भीड़ होती थी कि एक रुपया का सिक्का भी नही रखा जा सकता था लेकिन पापा मुझे कंधे पर बिठा लेते थे ,फिर हम मेला घूमते,खिलौना खरीदते और घर लौटते वक्त माँ और दीदी के लिए ढेर सारी मिठाई लेकिन वो मिठाई भी हम ही खाते थे घर पर ।ऐसा बरसों तक होता रहा जब तक हम वहां रहे । आज भी जब जाता हूं तो मेरी पहली कोशिश होती है कि कतरास उतरु । खैर अब ये सब महज याद है क्योंकि अब ये रेल लाइन बन्द हो गया । आखिर ये रेल लाइन बन्द क्यों हुई ये भी जान लीजिए । धनबाद का पूरा इलाका कोयले से भरा हुआ है । ये कोयले की कटाई 100 साल से अधिक वक़्त से हो रही है । कोयला निकाल कर उस जहग पर बालू भरने का रिवाज है लेकिन भ्रष्ट तंत्र,नेता,ठेकेदारों ने इसमें खेल किया और कागजों पर बालू भराई को दिखाया ,नतीजा ये हुआ कि पैसे कमाने के खेल में ये काम कई सालों तक किया गया और जमीन के अंदर आग लग गई । ऊपर से धनबाद का कोयला कोकिंग कोल ( कोयला दो तरह का होता है कोकिंग और नॉन कोकिंग कोल, कोकिंग कोल ज्यादा कीमती होता है ) । जमीन में आग लगने के बाद भी इसपर किसी ने ध्यान नही दिया और आग बढ़ती गयी , आज के वक़्त में वहा आपको जमीन के अंदर से निकलते धुंए दिन में भी साफ साफ दिखेंगे । धनबाद से लेकर चंद्रपुरा के बीच कुल 13 रेलवे स्टेशन प्रभावित हुए है ,इनके आस पास हज़ारो लोगो का घर चलता था,बाजार चलता था सब उजड़ जाएंगे । मुझे आज भी भोला झालमूढ़ी वाला याद है ,ट्रेन में झालमूढ़ी बेचता था और गाना गाता था,चुटकुले सुनता था, आज भोला जैसे सैकड़ों लोग बर्बाद हो गए है ।कोयला मंत्रालय और रेल मंत्रालय इस बात के लिए लड़ रहे है कि पटरियों की शिफ्टिंग का खर्चा कौन देगा ? स्टेशन बन्द है अब इनमे से कोयला निकाला जाएगा ,आउटसोर्स होगा, मुनाफा होगा, जो विधायक और सांसद, नेता आज लोगों के पक्ष में उतर के तमाशा कर रहे है वही लोग कल कोयला निकालने के लिए ठेका लेंगे, अपना परसेंटेज बांधेंगे, पैसा नही देने पर इनके लड़के धमकी भी देंगे । लेकिन सवाल इससे भी आगे का है कि आग को रोकने के लिए वक़्त पर कदम क्यों नही उठाया गया ? अगर उठाया गया तो आग पर काबू क्यों नही पाया जा सका? कौन से लोग इसपर काम कर रहे थे ? उनके फ़ेल होने की जिम्मेदारी किसकी है ? ऐसे लोगों पर कार्रवाई हुई या कब होगी ? मौजूदा समय मे इलाके के सांसद,विधायक और राज्य और केंद्र में बीजेपी की सरकार है लेकिन किसी ने इस फैसले को रोकने की जहमत नही उठाई ? इस रूट पर रेल परिचालन की बन्दी की मंजूरी पीएमओ ने दी है । क्या पीएमओ ने ये नही पूछा कि इन स्टेशन पर निर्भर लोगो की जिंदगी का क्या होगा ? ये लोग अपना पेट कैसे पालेंगे ? क्या पैसे के खेल में जिंदगी की कोई मायने नही है ? इलाके के मौजूदा विधायक ढुल्लू महतो, सांसद पीएन सिंह सड़को पर है लेकिन ये लोग साल भर से कहा थे ? अखबारों में बयान छपवाने के अलावा क्या किया है ? ये मसला सिर्फ रेल लाइन का नही लाखों लोगों की जिंदगी का है, कोयला निकासी में हुए व्यापक भ्र्ष्टाचार का है । मैं अपने तमाम साथियों से अपील करता हूँ कि हमे अब लाखों लोगों को भूखे मरने से बचाने के लिए कदम उठाना होगा । ये वक़्त बहुत मुश्किल है , राज्य में विपक्ष के लोग सुस्त है, स्थानीय नेता ढुल्लू महतो से टकराने की हिम्मत नही रखते, सांसद से सवाल पूछने वालों का क्या होगा ये हम जानते है । मीडिया अब भी चरण वंदना में जुटा है लेकिन क्या हम लोगों को मरने के लिए छोड़ दे ? भ्रष्ट तंत्र की साजिशों का भेंट मेरे बचपन का एक अहम हिस्सा चढ़ गया। ये ठीक मेरी यादों को मिटाने जैसा है । ऐसे लाखों लोग है जिनकी यादे और जिंदगी इस रेल रूट से जुड़ी है तो क्या सत्ता सिर्फ तमाशबीन बनी रहेगी , मुस्कुराती रहेगी, मुनाफा कमाएगी या उजड़ती जिंदगी और यादों को बचाने के लिए कोई उठाएगी, यही असल सवाल है ।
Friday, June 9, 2017
ये जो देश मेरा महान है ......!
Tuesday, March 14, 2017
यूपी में बीजेपी के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां ?
Tuesday, February 14, 2017
उत्तराखंड वालों वोट देना दिल नहीं !
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मौत के बाद पहला इन्टरव्यू नमस्कार, मैं ऋषिराज आज आपको एक ऐसा इन्टरव्यू पढाने जा रहा हूं जो अपने आप में नये किस्म का हैं। मैने मर चुके दल...
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स रकार के मंत्री हो या फिर प्रवक्ता, हर कोई सिर्फ एक ही बात कह रहा है कि वो मुस्लिम महिलाओं की आजादी के पक्ष में खडें है लेकिन क्या सिर...
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सोशल मीडिया में श्रीदेवी की मौत के बाद से ही ये चर्चा का विषय है की आखिर इतनी फिट दिखने वाली श्री को अचानक ऐसा क्या हुआ की उनकी ...
