Sunday, January 18, 2015

सह -मात और बीजेपी का प्रपंच!

वो बीते दिनों की बात हो चुकी है जब नीतियों के आधार पर सियासत के हुक्मरान राज करते थे और मौजूदा दौर में राज करने के लिए नीति बनाई जाती है । इसका जिक्र इसलिए क्योकि राजनीति में इनदिनो बीजेपी अपने चरम पर है और ऐसे ही कई और छलांग लगा कर एक नई ऊचाई पर पहुचने की कोशिश जारी है । बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 सीटों पर समेट दिया । लोकसभा के नतीजो के बाद गुजरात की जोड़ी यानि मोदी और साह ने अपनी दस्तक का अहसास दिल्ली और संघ को बखूबी करा दिया । मोदी पीएम बने और साह बीजेपी के मुखिया । फिर यही से शुरु हुआ सह और मात का खेल ,गौर करे तो सह और मात का खेल इस जोड़ी ने लोकसभा के चुनाव के वक़्त ही शुरु कर दिया था । बीजेपी ने चुनाव में जाने से पहले कई लोगो को तोडा और अपने पार्टी में शामिल किया । कुल 120 ऐसे उम्मीदवारों को टिकट मिले जो इधर उधर से लाये हुए थे । माहौल कांग्रेस के खिलाफ बनती गयी और बीजेपी बड़ी पार्टी का आकार लेती गयी । ये बीजेपी का सह और मात का खेल ही था जिसने कांग्रेस को कांग्रेस के खिलाफ ही खड़ा कर दिया ,पार्टी छोड़ते नेताओ के आरोपों को कांग्रेस ख़ारिज ही नही कर पाई और इसी बीच एक बढिया मैनेजमेंट ने कांग्रेस को हाशिये पर खड़ा कर दिया । लोकसभा के चुनाव में जिस तरीके के लोक लुभावन बाते की गयी और जनता को ये दिखाने की कोशिश बहुत हद तक सफल रही जिसमे बीजेपी एक ऐसी पार्टी मालूम हो रही थी जो जनता के हर मर्म को समझ कर उसके मुसीबत का हल निकाल सकती है । दागी उम्मीदवारों उम्मीदवारों को टिकट और एक तरफ साफ़ राजनीति की बात दोनों ही काम बीजेपी कर रही थी और जनता जब तक समझती लोकसभा में बीजेपी 282 सीटो के साथ पहुच गयी । इन आंकड़ो में 95 ऐसे सांसद ऐसे है जो दुसरे दलों से आये है जिसमे कांग्रेस से लाये गये उम्मीदवार सबसे ज्यादा है । लोकसभा के बाद भी मोदी के भाषणों का तेवर नही बदला ,वो लगातार विपक्ष के भाषा बोलते रहे और एक -एक कर के हरियाणा के स्थानीय कांग्रेस में फुट डाल कर कई लोगो को अपनी पार्टी में शामिल करते गये ,ये सिलसिला यही नही रुका महाराष्ट्रा, झारखंड जम्मू-कश्मीर में भी बड़ी मात्रा में दुसरे दलों से लोगो को लाकर टिकट दिया । कई दागियो और बाहुबलियों को भी टिकट मिला और सीट बीजेपी के खाते में पक्की हुई । झारखंड में तो 19 ऐसे विधायक ऐसे जीत कर आये जो गंभीर आपराधिक केस में नामदज है । झारखंड के बाघमारा सीट से जीते विधायक पर तो 31 केस दर्ज है । बहरहाल ,ये सिलसिला यही नही रुकता है बंगाल में आगामी चुनाव को देखते हुए तोड़-फोड़ शुरु कर दी गयी है जिसमे ममता दीदी के एक मंत्री ने बीजेपी का दामन थाम लिया और आने वाले वक़्त में ऐसे कई और लोगो को पार्टी में शामिल किया जायेगा । इसमें कोई शक नही है कि बीजेपी सम्पूर्ण रूप से केवल और केवल चुनाव हर क़ीमत पर जितना चाहती है । दिल्ली में चुनाव का तारीख ऐलान जैसे ही हुआ पार्टी सक्रिय हो गयी है और एक के बाद एक आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए उनकी ही पार्टी के लोगो को अपने पार्टी में शामिल किया जा रहा है । अश्वनी उपाध्याय हो, शाजिया इल्मी, विनोद कुमार बिन्नी और कई ऐसे लोग जिनको बीजेपी आम आदमी पार्टी के खिलाफ ही इस्तमाल करने जा रही है मात देने के लिए । बीजेपी के ये गुजरती बन्धु चुनाव को जिस चुनौती के रूप में ले रहे है उससे ये तो साफ़ है कि चुनाव के हर मर्म इनके पास है । जहा बीजेपी कमजोर पड़ती है वहा छोटी पार्टियों को या निर्दलीय को खड़ा कर पहले सह देती है और सामने वाली पार्टी को मात । ये सह और मात का खेल ही था जिसने अडवानी और जोशी सरीखे नेताओ को एक कोने में डिस्प्ले बोर्ड पर टांग दिया गया ,गुजरती बन्धुओ ने पाराशुट से उम्मीदवार गिराने की शुरुआत की है जिससे पार्टी के अन्ध्रुनी कलह पर पूरी तरह लगाम लगा कर चाभी अपने पास रखी जाये । इसके लिए आप हरियाणा या झारखंड का पन्ना पलट कर देख सकते है । मौजूदा दौर में किरण बेदी के आने से भी दिल्ली बीजेपी में भी कुछ ऐसा ही माहौल बनाया गया है जिससे दिल्ली की राजनीति में खुद को सह दिया जा सके और आम आदमी पार्टी को मात । आनेवाले दौर में देखना ये है कि इस सह और मात के खेल में गुजरती बन्धुओ पर कोई लगाम लगा पायेगा या इस सह और मात के खेल में गुजरती बन्धु बीजेपी का कोंग्रेसीकरण करके खुद को ही मात दे बठेंगे !