Monday, June 6, 2016

सरकार को जीत के हैंगओवर से निकलने की जरूरत है...!


देश की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी तो नहीं हैं लेकिन मौजूदा दौर में पैसे और सपने को पूरा करने की बेतहसा दौड़ के बीच लोग इन हालातों से या तो समझौता कर आगे बढ़ गए है या फिर उन्हें देश के हालात से ज्यादा उनके जेब में बढ़ता नोटों का दबाव मजा देने लगा है. जी,  ठीक –ठाक तरीकें से अगर आपको इस देश के हालात को समझना हो और ब्यूरोक्रेसी की मोटी चमड़ी से रूबरू होना हो तो आपको यूपी के बुंलदेलखंड, महाराष्ट्र के विदर्भ या लातूरया फिर छत्तीसगढ़ के बस्तर ,दंतेवाड़ा, जगदलपुर और झारखंड के लातेहार, सिंहभूम ,गढ़वा ,चतरा जाना पड़ेगा.ऐसा नहीं हैं कि देश में ये हालात पिछले 2 सालों से इस देश पर राज कर रहीं मोदी सरकार के दौरान बने है.दरअसल हमारे देश का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है जिससे देश कभी उबर ही नहीं पाया. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अंग्रेजी हुकूमत को राज करने में मदद करने वाला कोई विदेश से आये लोग नहीं बल्कि इसी मुल्क के लोग थे जो लगातर अंग्रेजी हुकूमत को मदद पहुंचा रहे थे और लगातार देश लूटता चला जा रहा था. ऐसा नहीं था की देश को आजादी मिलते ही देश में सब कुछ सुधर गया था. आजाद भारत के दामन में सबसे पहला दाग जीप घोटाले का लगा.खैर इस देश में घाटोला होना और उसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप होना इन दिनों आम बात हो चुकी है.इन सब के बीच मोदी सरकरा ने अपने कार्यकाल के 2 साल पूरे कर लिए है और सरकार अपना लगातार महिमामंडन खुद कर रही है और दुसरों से भी करवा रहीं है। कांग्रेस के कार्यकाल के बारे में बहुत चर्चा हो चुकी है और अब जरूरत हैं कि केंद्र में बैठी मोदी सरकरा के बीते 2 सालों का भी आंकलन करना शुरू कर दिया जाए.मोदी सरकार के 2 साल के कार्यकाल पूरा होने पर एक नारा दिया जा रहा है कि मेरा देश बदल रहा हैं और आज के दौर का मौजूदा सवाल भी यही है कि क्या वाकई देश बदल रहा है या फिर सब कुछ जस का तस है ! बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम काज को देखा जाए तो जरूर ये कहा जा सकता है कि देश के मौजूदा दौर को हो रहे उर्जा के संचार का एक बड़ा केंद्र खुद पीएम मोदी है लेकिन अगर हम मोदी के मंत्रीमंडल का आंकलन शुरू करे तो जरूर ये महसूस हो रहा है कि ये सरकार भी पिछली सरकार की तरह ही है बस सत्ता में बैठे लोगों के चेहरे बदल गए है ।पिछली सरकार में भी राज्यसभा के जरीए देश चल रहा था और इस बार की सरकार भी देश राज्यसभा के जरिए ही चला रही हैं । सत्ता में बैठी पार्टी के लिए सबसे जरूरी चीज हैं कि वो जनता के मन में असंतोष पैदा नहीं होने दे .मोदी के विवादित मंत्रियों के काम काज का आंकलन भी जरूरी हैं क्योंकी देश की जनता का एक बड़ा हिस्सा मोदी से संतुष्ट तो हैं लेकिन उनके मंत्रियों से खार खाए बैठे है .बतौर शिक्षा मंत्री स्मृति इरानी के ही कामकाज को देखा जाए तो देश में छात्रों का एक बड़ा तबका स्मृति से नाराज बैठा है क्योंकि लगातार एक के बाद एक देश के बड़े विश्वविद्यालयों में विवाद को जिस तरह से निपटाने की कोशिश हो रही हैं उससे उन्हें लग रहा है कि उनकी आवाज को कही न कही दबाया जा रहा है । पीएम मोदी को इस बात का ख्याल रखना भी जरूरी हैं कि एक वक्त इंदिरा गांधी से नाराज छात्रों का ही आंदोलन इंदिरा गांधी के इतिहास को काला कर गया था और मौजूदा दौर के पीएम इस बात को जितनी जल्दी समझे उनके लिए उतना ही फायदेमंद होगा.यहां जिक्र देश के वित्त मंत्री अरूण जेटली का भी जरूरी है.देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था उसी दौर में अब भी दिख रही हैं जिस दौर में यूपीए कि सरकार उसे छोड़ गई थी.बल्की एक कदम और आगे इस व्यवस्था पर गौर करें तो मालूम होगा कि पिछली सरकार के नीतियों को आगे बढाते हुए मौजूदा वित्त मंत्री अरूण जेटली ने देश की जनता के जेब में हाथ मारते हुए कई जगहों पर टैक्स बढ़ा दिया जिससे छोटी से छोटी चीज भी मंहगी हो गई. यहां बात पेट्रोल और डीजल की भी जरूरी है जिससे सरकार और तेल बेचने वाली कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही है। यूपीए के दौर में पैट्रोल उस वक्त 70 रूपय का था जब अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल130 डॉलर प्रति बैरल का हुआ करता था और आज के वक्त में पेट्रोल 60 का हैं जबकि अंतराष्ट्रीय बाजार में तेल 50डॉलर प्रति बैरल से भी कम हैं.ये तो बात शिक्षा और वित्त मंत्रालय कि हुई. हमें एक नजर देश के गृह मंत्री के भी काम पर डालना जरूरी है .देश की मौजूदा मोदी सरकार पर लगातार अष्हिणु होने के आरोप लगते आ रहे थे और साथ ही किसी भी विवाद में एक पक्ष को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगता रहा है।देश में बीफ के लेकर हो रही बहस हो या दो समुदाय का आमना – सामना , मोदी सरकार पर लगातार ऐसे मामलो को दबाने और अपने निजी स्वार्थ के हिसाब से काम करने का आरोप भी लगा। वहीं पीएम मोदी के लिए बेहद जरूरी है कि जिस नक्सलवाद को लेकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने जो अपनी चिंता जताई थी उसका हल वो अपने कार्यकाल में जरूर ढूंढ ले क्योंकि देश का मौजूदा नक्सलवाद नासूर बनता जा रहा है और सहीं कार्रवाई नहीं होने के कारण देश की जनता के अंदर असंतोष भी पैदा कर रहा है।मोदी सरकार के आने के बाद हिंदूवादी संगठन भी लगातार अपना विस्तार करना चाहते है और उसी का नतीजा है कि कथित तौर पर जानवर का कारोबार करने वालों को, बीफ खानेवाले को , कथित देशद्रोह करने वालों पर भीड़ हमला कर देती है.कई जगह भीड़ इतनी हिंसक होती है कि खुद को इस देश के सर्वोच्य व्यवस्था से उपर उठ कर सड़क पर कथित इंसाफ कर देती है। देश ही नहीं बल्की विदेश की मीडिया द्वारा भी अपने देश की ऐसी कई घटनाओं को जोर शोर से उठाया गया लेकिन आश्वासन के अलावा सरकार इस देश को इन मुद्दो पर ज्यादा कुछ दे नहीं पाई. यकिन मानिए ये सारी चीजें धीर –धीरे एक बड़े अंसतोष का रूप ले लगी जिससे मोदी सरकार को पार पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा इसलिए जरूरी है कि पीएम मोदी पहले ही इन तमाम चीजों से सबक ले .मोदी सरकार के कई ऐसे मंत्री भी है जो अब मोदी के लिए गले की फांस बन गए है. चाहे वो उमा भारती हो या फिर गिरिराज सिंह या इनके जैसे कई और मंत्री जिनके मंत्रालय में काम से ज्यादा तामझाम है और जनहित नदारद. पीएम मोदी के पास 3 साल और है जिनमें उनकी कोशिश होनी चाहिए कि वो देश के विकास को और तेजी दे पाएं. साथ ही पीएम मोदी को जनता की मूड का भी ख्याल रखना जरूरी होगा, कहीं ऐसा न हो जाए की देश की अर्थव्यवस्था की बगड़ती तबीयत को सुधारने के चक्कर में जनता का ही मूड बिगड़ जाए और देश बदलने से पहले 3 साल बाद फिर सरकार ही बदल दी जाएं. तो ऐसे में कहना होगा की सरकार को अपने जीत के हैंगओवर से निकल कर जमीनी हकीकत से रूबरू होने की जरूरत है ....

 ऋषिराज

Thursday, April 14, 2016

पानी-पानी रे....

देश में सूखे की मार और पानी के लिए जारी संग्राम के बीच मौसम विभाग की ओर से सुकून देने वाली खबर आई है। मौसम विभाग ने अनुमान जाहिर किया है कि इस साल सामान्य से छह फीसदी अधिक 110 फीसदी बारिश होगी। पिछले साल 104 फीसदी वर्षा दर्ज की गई थी। सूखे से तरसते देश के लिए इससे राहत की खबर और क्या हो सकती है। इस अनुमान में गौर करने लायक बात यह है कि देश के जिस हिस्से में सूखे की मार ज्यादा है, वहां भी अधिक वर्षा होने की बात कही गई है।
इस वक्त महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ क्षेत्र और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र सबसे अधिक सूखे के हालात का सामना कर रहे हैं। निश्चित ही अधिक वर्षा होगी तो सरकार के लिए भी राहत की बात होगी, कारण कि खरीफ फसलों की अधिक पैदावार होगी। अनाज की बंपर उपलब्धता से पीडीएस स्कीमों में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी और महंगाई पर नियंत्रण रखने में भी मदद मिलेगी। बड़ा लाभ यह होगा कि अधिक वर्षा होने से भूजल का स्तर सुधरेगा। महाराष्ट्र में भूजल का स्तर सूख जाने के चलते ही पानी का भीषण संकट उत्पन्न हुआ है। लेकिन ये सारी स्थिति मौसम विभाग के अनुमान के हकीकत में बदलने पर निर्भर करेगी। फिलहाल देश में सूखे और पानी को लेकर संकट गहराया हुआ है। समय पर राज्य सरकारों के सजग नहीं होने के चलते आम जनता को इससे दो-चार होना पड़ रहा है।
इन समस्याओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक को सुनवाई करनी पड़ रही है। सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र में आईपीएल मैच के दौरान पानी की बर्बादी पर सुप्रीम कोर्ट को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रति सख्त रुख अपनाना पड़ा और कठोर हिदायत देनी पड़ी कि आप मैच पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्र में कराएं। महाराष्ट्र के ही लातूर में जल संकट इतना गहरा गया कि सरकार को ट्रेन से पानी उपलब्ध करानी पड़ी है। मध्य प्रदेश में नलकूप से पानी भरने को लेकर एक लड़की की हत्या कर दी गई। सूखे से निपटने में हीलाहवाली के चलते सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात, हरियाणा और बिहार सरकार को फटकार लगाई। समय पर अगर सरकारें नहीं चेतीं, तो आने वाले समय में पेयजल के लिए देश में संग्राम छिड़ सकता है।
सूखे के चलते कृषि पर असर पड़ता है और भूजल स्तर में गिरावट आती है। केंद्र सरकार को अपनी राष्ट्रीय जल नीति में इन मुद्दों पर फोकस करना चाहिए। नीदी जोड़ो योजना भी आगे नहीं बढ़ पा रही है। नमामि गंगे योजना में भी तेजी लाने की जरूरत है। एक बड़ी बात यह है कि जब हम ईरान-कुवैत से पाइपलाइन के जरिये कच्चा तेल देश ला सकते हैं, तो हम देश भर में पानी उपलब्ध कराने के लिए पाइपलाइन का संजाल क्यों नहीं बिछा सकते हैं। हमारे देश में पानी की कमी नहीं है, नदियों की भरमार है, बस असमान उपलब्धता है। देश में ही डीआडीओ और इसरो के वैज्ञानिकों ने खारा पानी को पीने लायक शोधन करने की सस्ती तकनीक बनाई है।
सरकार को भी यह मालूम है। लेकिन लगता है कि पानी माफिया के आगे राज्य सरकारें बौनी साबित हो रही हैं। केंद्र सरकार को जल संकट दूर करने की दिशा में समग्रता में जल्द से जल्द ध्यान देना चाहिए। वरना मौसम अनुमान में ही हम संकट का समाधान ढूंढ़ते रहेंगे?

Friday, February 19, 2016

बीजेपी: एक भटकी हुई पार्टी


नमस्कार मैं ऋषि राज ,आज आपके सामने एक ऐसे विषय पर बात करने  जा रहा हूं जिसके बारे में हर कोई बात करने से कतराता है । देश का मिजाज राजनैतिक  और भावनात्मक है हम लोग अकसर इसमें बह जाते है । आखिर क्यो मुझे बीजेपी को भटका हुआ कहना पड़ रहा है  इसके मैं आपको पुख्ता तर्क भी देने जा रहा हूं ।
  तेल- सबसे पहले देश में मौजूदा सरकार की बात करता हूं। जब एनडीए विपक्ष में थी लगातार यूपीए सरकार को  तेल के मामले पर निशाने  पर रखती थी । जब तेल के दाम बढ़ते तो विपक्ष आग बबूला होकर तंज कसता कि क्या अब तेल देश के प्रधानमंत्री के उम्र को पार करेगा ? किस्मत का फेर देखिए  जब देश में चुनाव हुए और सत्ता बदली तो पट्रोल डीजल कि  आसमान छूती कीमत अंतराष्ट्रीय बाजार में जमीन के बराबर आ गयी। जिसका फायदा आपको सीधे मिल सकता था वह फायदा सरकार उठा रही है । मौजूदा तेल की कीमत पिछली सरकार के मुकाबले तो कम है लेकिन जितना फायदा जनता को मिलना चाहिए था उसको एक्साईज ड्यूटी लगा कर रोक दिया गया। मौजूदा क्रूड ऑयल की कीमत 27 डॉलर है जिसके मुताबिक पेट्रोल 45 रूपये और डीजल 35 रूपये के आस-पास बिकना चाहिए था लेकिन देश की जनता अब मौज में है उन्हें अब तेल की कीमत से फर्क नहीं पड़ता और वो जो पार्टी विपक्ष में रहकर देश की जनता को मंहगाई की मार से बचाने की हुंकार भरती थी वो सत्ता में आकर जनता को मिलने वाले हक पर कुंडली मार के बैठ गयी है ।
  असहिष्णुता – देश में इस विषय को लेकर जबरदस्त तरीके से बहस हो रही है । कोई पक्ष में है तो कोई विपक्ष में है लेकिन सबसे बड़े पहलु पर कोई गौर करना ही नहीं चाहता । अब आप बताईये पूरा का पूरा देश असहिष्णु कैसे हो सकता है ? हा हमारे देश में एक वर्ग तो शुरू से है जो दमन पर भरोसा रखता है । वो वर्ग सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और अखबार –टेलीवीजन के जरीए लोगो को भड़काने का सदैव प्रयास करते रहते है । देश की सरकार का मनना है कि देश में सब कुछ अच्छा है तो उन्हें दादरी की घटना को देखना चाहिए जहां केवल इस शक के आधार पर कि उसने गौ मांस खायी है उस मुसलमान को पीट-पीट कर मार दिया जाता है । तो वही विपक्ष आरोप लगाता है कि ये सरकार मुसलमानो को खिलाफ है तो उन्हें मालदा कि घटना देखनी चाहिए जहां 2 लाख मुस्लिम जमा होकर 30 गाडीयों और पुलिस थाना को आग लगा देते है सिर्फ इसलिए क्योकी एक व्यक्ति नें उनके पैगम्बर को गे  कह दिया । पूरे देश में मुस्लिम समुदाय उसे फांसी पर चढ़ाने की मांग करता है जबकि कानून के तहत उसकी गिरफ्तारी हो चुकी होती है । पुणे में एक लड़के का हाथ कुछ मुस्लिम इसलिए काट देते है क्योकी वो हिंदु है । असहिष्णु हमेशा से हमारे देश का एक वर्ग रहा है जो अलग-अलग धर्मो से आते है । ये वो लोग है जो आपके विचार से असहमत होकर आपसे गाली-गलौज करते है और आपको पाकिस्तान भेजने तक की धमकी भी दे देते है । अक्सर ऐसे लोग ये भूल जाते है कि एक आजाद लोकतांत्रिक देश का अर्थ ही ये है कि अगर आप कोई बात रखनी चाहते है तो बिना किसी भय के वो बात आप कह सके ।आप असहमत भी है तो उसे धर्य रख कर सुने । हाल ही में शाहरूख खान और आमिर खान के बयान के बाद जैसे लोगो ने उनसे बर्ताव किया वो असहिष्णुता को सही साबित करता है लेकिन विपक्षी पार्टी ने बिहार राज्य का जैसे ही चुनाव जीता वैसे ही असहिष्णुता पर चर्चा से मन भर गया ।
 देशभक्ति – जी देश की मौजूदा  बीजेपी सरकार के मंत्री और उनके समर्थक  हर बात को ऐसे रंगने की कोशिश करते है कि उनकी सरकार अब तक की सबसे बड़ी देशभक्तों की सरकार है । हर बात को देश से जोड़ना कोई इन लोगो से सीखे। देश में ऐसा महौल खड़ा किया जा रहा जिसके तहत लोगो को ये सगने लगा है कि मौजूदा सरकार की विचारों से असहमति रखना देश से गद्दारी जैसा है । राष्ट्रहीत और देश प्रथम की बात करने वाली बीजेपी कश्मीर पहुंचते ही देशभक्ति भूल गयी और अलगाववादियो को हमेशा से एक पक्ष मानने वाले पीडीपी से हाथ मिलाकर जम्मू-कश्मीर में सरकार बना लेती है और हर जुम्मे को वहां आईएसआईएस और पाकिस्तान के झंडे को लहराया जाते है जिसे वो सत्ता के लोभ में बर्दाशत करते रहती है । मौजूदा सरकार के मंत्री और समर्थक बात-बात पर देशभक्ति का सर्टीफिकेट बांटते है लेकिन  देश के समझदार नागरिको को यह समझना जरूरी है कि हिन्दुवादी होना आपके देशभक्त होने का प्रमाणपत्र नहीं है। देशभक्त तो कोई भी हो सकता है चाहे वो हिन्दुवादी हो, सेक्युलर हो, वामपंथी हो या फिर मानवधर्म की बात करने वाला हो ।देशभक्त होने के लिए सबसे पहले आपको अपने देश कि अखंडता के बारे में सोचना होता है नाकि आप हिन्दु राष्ट्र की सिफारीश करे या फिर सरीयत के कानून को लागू करवाना आपकी ख्वाहिश हो ।
सरकारी नीति- देश कि सरकार  इन दिनों ऐसी स्थिती में जा पहुंची जा उसके सामने एक पथ नहीं अनेक पथ है लेकिन वो सारे के सारे पथ अग्निपथ है। बीजेपी जबसे सत्ता में आयी है वो लगातार विचारधारा की चक्रव्यूह में फंसी हुई हैं। सत्ता में आते वक्त बीजेपी विकास की विचारधारा के साथ खड़ी थी लेकिन बीतते वक्त के साथ विकास की प्रथमिकता कम हुई और बीफ़ के मुद्दे पर सरकार चल पड़ी तो कभी सरकार के मंत्री राम मंदिर का विकास चाहती है तो कभी हिन्दुवादी संगठनो के सामने घुटने टेकती नजर आती है । मोदी जी ने सत्ता पाने के लिए देश से वादा किया कि ये जो सरकार है वो उनके चौकीदार है लेकिन उन्ही की चैकीदारी में सुषमा स्वराज से लेकर अरूण जेटली पर गंभीर आरोप लगे तो वही शिक्षा मंत्री अपने तौर तरीके से लेकर एक एबीभीपी संगठन के पक्ष में काम करने के आरोप से घिर गयी । हाल ही में हैदराबाद विश्वविधालय में रोहित वेमुला के आत्महत्या को लेकर भी शिक्षा मंत्रालय लगातार निशाने पर रहा । रोहित  सहित कई छात्रों पर कारवाई के लिए शिक्षा मंत्रालय ने 26 दिन मे ही 3 चिठ्ठी लिख दी तो वही इसी सरकार के नागरिक उदायन  मंत्री बंडारू दत्तात्रय  भी इस मामले में निशाने पर रहे और उनके उपर छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा और इस मामले में उनपर मुकदमा हो गया । सरकार ने इस मामले पर अपने मंत्रियो पर कोई कारवाई नहीं की और तो और सरकार छात्र की जाति से लेकर जांच समीति का बात में झुठ बोलते हुए पकड़ी गयी । खुद को देश का चौकीदार कहने वाले पीएम मोदी विकास की बात करते है लेकिन उनके मंत्री उटपटांग बयान देते रहते है जिसपर पीएम चुप्पी साधे रखते है जिस वजह से उनके मंशा पर लगातार सवालिया  निशान लगता आ रहा है । बीजेपी विपक्ष में रहकर  पाकिस्तान को लगातार निशाने पर रखती है लेकिन सत्ता में आते ही बीजेपी भटक गयी और लगातार हमले के बाद भी पाकिस्तान से दोस्ती के लिए प्रतिब्दध दिख रही है । विपक्ष में रहते हुए किसानों के लिए फिक्रमंद दिखती पार्टी सत्ता में आने के बाद किसान के लिए कई योजना तो लाती है लेकिन कर्ज किसानो का माफ करने के जगह उद्योग्पतीयो का करती है ।देश के युवाओ के लिए कई प्रोग्राम लॉंन्च करती है लेकिन उसे धरातल में उतारने में असफल दिखती है ।मनरेगा को लूट का अडडा मानने वाली बीजेपी सत्ता में आने पर उसका बजट कम कर देती है लेकिन एक साल बाद उसी मनरेगा को और बढावा भी देती है ।


        मेरी इन बातों के बाद भी आपको अगर यह महसूस नहीं हुआ कि  बीजेपी की सरकार एक भटकाव से जुझ रही है तो यह मेरी गलती है कि मैं आपको समझाने में नाकाम हुआ ।  आप इस लेख से जो भी समझे अगर यह न समझ पाये कि आपने वोट जिसको दिया, जिस मुद्दे पर दिया वह मुद्दा ही गायब हो रहा है तो आपको सरकार के बारे में पडताल करने की जरूरत है साथ ही यह भी जांच लीजिएगा कि कही आप भक्तेश्वर तो नहीं बन गये है । सरकार के गलत कामों का आप विरोध नहीं करते तो देश में हो रही गलत घटनाओं की जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उतनी आप की भी है । तय किजीए आप भक्त एक पार्टी के लिए है या देश के लिए ?
-ऋषिराज

Tuesday, January 19, 2016

मरने के बाद रोहित का पहला इंटरव्यू


मौत के बाद पहला इन्टरव्यू

नमस्कार, मैं ऋषिराज आज आपको एक ऐसा इन्टरव्यू पढाने जा रहा हूं जो अपने आप में नये किस्म का हैं। मैने मर चुके दलित छात्र रोहित का इन्टरव्यू किया है । ये मेरी एक कोशिश है कि एक शोषित वर्ग के छात्र को कैसी दिक्कते आयी होंगी । यहां आपको यह भी बता दूं यह इन्टरव्यू  काल्पनिक आधार पर किया गया है।इन्टरव्यू के जवाब रोहित के अंतिम पत्र पर आधारित हैं। यह सब मैने इसलिए लिख दिया क्योकी आज कल लोगो की भावनाए इतनी नाजुक और नंगी हो गयी है की कोई भी उन्हें ठेस पहुंचा देता है ।  आपको यह इन्टरव्यू पढ़ने पर बुरा लगे तो माफ किजीएगा अब वक्त आ चुका है कि हम अपनी गहरी नींद से जाग जाये। इस इन्टरव्यू के सवाल वैसे ही है जैसे आप रोजमर्रा के टेलीविजन में खोखली हो चुकी पत्रकारीता के सवाल  में देखते है ।
रिपोर्टर का सवाल – तो रोहित मरने के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं ?
रोहित का जवाब- जी , अच्छा और बेहद हल्का मेहसूस कर रहा हूं । अब केवल मै और मेरी आत्मा हैं । हम अब आराम से अपने मन के मुताबिक  अपने चुने हुए विषयो पर बात कर रहै है । यहा कोई और नही है जो मेरे बात करने या किसी विषय पर राय रखने पर मुझे देशद्रोही करार दे दे ।मैं जिंदा रहने से ज्यादा मर कर खुश हूं।
रिपोर्टर का सवाल – रोहित आपने आत्महत्या क्यो की ?
रोहित का जवाब- सब शुन्य हो चुका था । मैं खुद के शरीर और रूह के बीच एक खाई महसूस कर रहा था, दुनिया खोखली है ,सब दिखावटी  लोग है जो इस दुनिया में रहते है ।
रिपोर्टर का सवाल-  क्या आप अपने विश्वविधालय में जातिवादी और देशद्रोही गतिविधी कर रहे थे?
रोहित का जवाब- देश में कई ऐसे वर्ग के लोग है जो किसी के भी फांसी के पक्ष नहीं हैं। कई जज से लेकर मशहूर अभिनेता तक फांसी के पक्ष में नहीं है। हम लोग भी उसी पक्ष का एक हिस्सा थे । देश आजाद है हमें अपनी राय रखने का पुरा अधिकार है तो फिर हम देशद्रोही कैसे हो गये ? अफजल गुरू के वक्त भी कई नेताओ ने फांसी का विरोध किया ये लोग उन्हे देशद्रोही करार क्यो नहीं देते ?
रिपोर्टर का सवाल - तो आप मानते है कि याकूब को गलत सजा दी गयी?
रोहित का जवाब-  नहीं , मैं आपको बता दू कि हम फांसी देने के खिलाफ है किसी भी गुनहगार को फांसी न दी जाये हम इसके पक्ष में हैं। फांसी के अलावा कोई और भी सजा दी जा सकती हैं ।
रिपोर्टर का सवाल- आप दलित है क्या इस वजह से आपके साथ ऐसा किया गया ?
रोहित का जवाब- मैं ऐसा नहीं मानता, मेरा तो बचपन ही एक त्रासदी की तरह गुजरा है और बिल्कुल खाली । बचपन से लेकर अबतक ऐसा ही हुआ है और मेरे से पहले भी यही होता आया है ।
रिपोर्टर का सवाल- क्या आपको मालूम था कि आपके मरने के बाद लोग कैसे रिएक्ट करेंगे ?
रोहित का जवाब- हां शायद मुझे मालूम था कि मेरे मरने पर लोग मुझे कायर कहेंगे, वो यह भी कहेंगे की एक एजेंडे के तहत मै हिन्दुओ को विरोध करता था लेकिन  यकिन मानिए मुझ इन बातों से फर्क नहीं पड़ता । मै इन चीजो का आदी हो चुका हूं और उनके सोच पर अब मुझे तरस आता हैं।
रिपोर्टर का सवाल- आपको सरकार से शिकायत है ?
रोहित का जवाब- नहीं , मुझे अब किसी से शिकायत नहीं है । मैं क्या हम सब इस व्यवसथा के आदि हो चुके है जहां लोकतत्र के नाम पर सरकार जनता पर ही हुकुमत करती है ।
रिपोर्टर का सवाल-  आपने जान देने से पहले अपने परिवार के बारे में नहीं सोचा ?
रोहित का जवाब – सब कुछ सोच समझ कर किया । हर पहलु के बारे में सोचा और जब मन से शुन्य हो गया तो मुझे जीने से ज्यादा मरने में खुशी दिख रही थी । तो एक पत्र लिखा और फिर ....
रिपोर्टर का सवाल- आप 13 दिनों तक खुले आसमान में सोते रहे इसके पहले आप और आपके साथियो पर करावाई के लिए सरकार व्दारा लगातार पत्र लिखे जा रहे थे उसपर कोई टिप्पनी करना चाहेगे ?  
 रोहित का जवाब-  नही, जिसे जो करना  अच्छा लगा उसने वो किया ।यहां सभी दिखवटी लोग है मै किसी से कुछ नही कहुंगा ।
रिपोर्टर का सवाल- आपके दोस्त और आपसे हमदर्दी रखने वाले  लोग सड़क पर है ?
रोहित का जवाब- मुझे नहीं मालूम था कि इतने लोग मेरे लिए खड़े होगे । लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि ये लोग अगर शुरू से इतने जागरूक होते और लगातार आवाज उठाते तो किसी दलित को शोषित ही न होना पड़ता ।
रिपोर्टर का सवाल- अब आप मर चुके है लेकिन आपके मरने पर खूब राजनीति हो रही है?
रोहित का जवाब – अच्छा है शायद मेरे बाद मेरे किसी दोस्त को ऐसा कदम उठाने की जरूरत न पड़े लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम है ?
रिपोर्टर का सवाल – तो आप....(रोहित बीच मे रिपोर्टर को रोकते हुए )
रोहित- आप भी तो मेरे मरने के बाद आये शायद आपको इसी का इंतजार था कि कोई दलित मरे और फिर इसकी मौत पर जी भर कर तमाशा किया जा सके ...
( रोहित गायब हो जाते है )
रिपोर्टर का मुहं लटक जाता है और फिर वह भी ....

Sunday, January 17, 2016

रोहित भाई काश तुम दलित न होते!


अगर रोहित दलित नहीं होता तो शायद उसे होस्टल से नहीं निकलते । शायद उसका समाजिक बहिष्कार नहीं होता! उसके माँ बाप आज उसके शरीर से लिपट कर रो नहीं रहे होते ।
देखी तेरी रौब करारी..
ओ सरकारी..
तू तो निकली हत्यारी...

पढ़िए दलित युवक रोहित ने मरने से पहले क्या लिखा, और हम सब को सच का सामना करा गया।।

Good morning,
I would not be around when you read this letter. Don’t get angry on me. I know some of you truly cared for me, loved me and treated me very well. I have no complaints on anyone. It was always with myself I had problems. I feel a growing gap between my soul and my body. And I have become a monster. I always wanted to be a writer. A writer of science, like Carl Sagan. At last, this is the only letter I am getting to write.

I always wanted to be a writer. A writer of science, like Carl Sagan.
I loved Science, Stars, Nature, but then I loved people without knowing that people have long since divorced from nature. Our feelings are second handed. Our love is constructed. Our beliefs colored. Our originality valid through artificial art. It has become truly difficult to love without getting hurt.
The value of a man was reduced to his immediate identity and nearest possibility. To a vote. To a number. To a thing. Never was a man treated as a mind. As a glorious thing made up of star dust. In very field, in studies, in streets, in politics, and in dying and living.

I am writing this kind of letter for the first time. My first time of a final letter. Forgive me if I fail to make sense.

My birth is my fatal accident. I can never recover from my childhood loneliness. The unappreciated child from my past.
May be I was wrong, all the while, in understanding world. In understanding love, pain, life, death. There was no urgency. But I always was rushing. Desperate to start a life. All the while, some people, for them, life itself is curse. My birth is my fatal accident. I can never recover from my childhood loneliness. The unappreciated child from my past.

I am not hurt at this moment. I am not sad. I am just empty. Unconcerned about myself. That’s pathetic. And that’s why I am doing this.


objects in mirror are (never) closer than they appear. (From Rohit’s Facebook Wall)
People may dub me as a coward. And selfish, or stupid once I am gone. I am not bothered about what I am called. I don’t believe in after-death stories, ghosts, or spirits. If there is anything at all I believe, I believe that I can travel to the stars. And know about the other worlds.

If you, who is reading this letter can do anything for me, I have to get 7 months of my fellowship, one lakh and seventy five thousand rupees. Please see to it that my family is paid that. I have to give some 40 thousand to Ramji. He never asked them back. But please pay that to him from that.

Let my funeral be silent and smooth. Behave like I just appeared and gone. Do not shed tears for me. Know that I am happy dead than being alive.

“From shadows to the stars.”

Uma anna, sorry for using your room for this thing.

To ASA family, sorry for disappointing all of you. You loved me very much. I wish all the very best for the future.

For one last time,

Jai Bheem

I forgot to write the formalities. No one is responsible for my this act of killing myself.
No one has instigated me, whether by their acts or by their words to this act.
This is my decision and I am the only one responsible for this.
Do not trouble my friends and enemies on this after I am gone.

Tuesday, January 12, 2016

देश को एक नहीं अनेक जल मानव चाहिए...!

  
जल ही जीवन है यह बात आप और हम सब बचपन से ही सुनते आ रहे है लेकिन इसके मायने को समझने के लिए हमें अपने सोच को विकसीत करने की जरूरत है। एक वक्त था जब देश के लोग नदी और तलाब की पानी पिया करते थे जिसके बाद  कुंए का निर्माण हुआ  फिर लोग चापाकल(हैंडपंप)का इस्तमाल करने लगे और आज के वक्त हम नल के पानी से लेकर बोतल बंद पानी का इस्तमाल करने लगे  है । इन सब के बीच हम इस बात का ध्यान रखना भूल गये कि हम लगातार विकास के  साथ कदमताल करने के ऐवज में अपने इलाके के नदी –तलाबो को ही खत्म कर बैठे । हमने न केवल  नदी –तलाबो को खत्म ही नहीं किया बल्कि जल की गुणवक्ता को खराब करने में पूरी भूमिका निभायी । अब हमें ऐसा वक्त भी देखने को मिल रहा है जहां पानी पर अधिकार के लिए लड़ाई तक की जा रही है।  हमारे देश में भी जल बटवारे को लेकर कई राज्यो में आपसी तकरार हैं। यही कहानी हमें विश्व के कई अन्य देशों में भी देखने को मिल रही हैं। पानी एक ऐसा आधार है जो किसी ईलाके के बसने और उजडने का मुख्य कारक होता हैं लेकिन हम इंसानी फितरत वाले लोग जो ठहरे, हमने जल संरक्षण के जगह उंची इमारतो और फैक्ट्रीयों को तरजीह दी, शहर और गांव में गिरते जल स्तर को बचाने के जगह बोतल बंद पानी को तरजीह दी । आज के मौजूदा हालत ऐसे हो चले है जहां पानी उपल्बध न होने के कारण लोग अपने पैतृक निवास को छोड़ने पर मजबूर हैं। पानी की मौजूदगी नहीं होने से किसान खेती छोड़ रहे है तो कहीं किसानो की फसलें बर्बाद हो रही हैं। हमारे देश में विदर्भ और बुंदेलखंड जैसे ईलाके से खेती करना मौत को गले से लगाने जैसा माना जाने लगा हैं । हमें जरूरत है कि ऐसी विचारधारा को बदला जाये और खेती छोड़ रहे किसानो को दुबारा मुख्यधारा में लाया जाये ।हम ऐसा तभी कर सकते है जब हम जल संरक्षण को लेकर तेजी से काम करना शुरू कर दे । हमारे देश की सरकार इस तरफ कब सोचेगी यह तो कहना मुशकिल है लेकिन समाज में अपनी जिम्मेदारीये को समझने वाले लोग इस दिशा में दशकों से काम कर रहे है। राजस्थान के राजेन्द्र सिंह भी उन लोगो में से एक है जो जल सरक्षण को अपने जीवन का मकसद मानकर इस दिशा में काम कर रहे हैं। इन्होने जल संरक्षण से राजस्थान की मर चुकी 7 नदीयो को जिदां किया हैं साथ ही 1000 गांवो में दुबारा पानी को पहुंचाया है। इनके काम को देखते है हुए इन्हें कई अंतराष्ट्रीय मंचो पर सम्मानित किया जा चुका हैं। बहरहाल ,हमें जरूरत है कि सरकार ऐसे लोगो को एक मंच प्रदान करे जिससे ये  लोग जल संरक्षण की चेतना को लोगो के अंदर जगाये । ये बेहद ही दुर्भाग्यपुर्ण है कि राजेन्द्र सिंह (जल मानव ) जैसे लोगो का  ईस्तमाल देश और राज्य की किसी भी सरकार ने नहीं किया । यहा यह कहना भी जायज नही है कि सरकार ने कभी अपने स्तर से जल सरंक्षण के विषय पर गंभीरता से काम किया होगा अगर किया होता तो हमारे सामने खेतो में किसानो की लटकती लाशे नहीं होती।  जैसे- जैसे वक्त बीतेगा पानी की समस्या और गहराती चली जायेगी । खतरा इस बात का भी है कि तीसरा विश्व युध्द पानी को लेकर लड़ा जा सकता है ।क्या वाकई हम इतने गैर-जिम्मेदार हो चुके है या फिर हम इतने खुदगर्ज हो गये है कि पानी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा तो दूर कभी अकेले में बैठ कर सोचते तक नहीं है । क्या देश की सरकार केवल और केवल कंक्रिट के जंगल को खड़ा कर हम तक हर सुविधा पहुंचा सकती है ?क्या देश के किसानो और सुखे पड चुके इलाको के प्रति हमारी कोई जिम्मेदारी ही नहीं बची है ? अन्न पैदा करने वाले कब तक अन्न के अभाव में बिना अन्न के प्राण त्यागते रहेंगे ? हमारे विकसीत हो जाने के चाह के बीच यह भी जरूरी है कि हम अपने नींव को जड़ से मजबूत करें और राजेन्द्र सिंह (जल मानव) जैसे लोगो की संख्या समाज में बढ़े इस दिशा में कोशिश करनी चाहिए वरना  वह दिन भी दूर नहीं होगा जब हम एक बोतल पानी के बदले एक जान लेने तक के लिए तैयार हो जाये । जल संरक्षण ही ऐसा एक मंत्र है जिससे सुखे इलाको को हरा भरा किया जा सकता है, फसले फिर से लहलहा सकती है और किसानो के घर भी ठहाको की अवाज सुनाई पड़ सकती हैं ।  


Thursday, December 10, 2015

देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में !


 देखो ,सत्ता बिक रही है बाज़ार में ।
खरीदने वालो की संख्या है हज़ार में ।।
जो सत्ता के  दुलारे है वो खड़े है एक कतार में।।
देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में ।
दुपट्टा गिरा कर सौदा करने वाले ,मगन है पैसो की अंधकार में।।
 देखो, सत्ता बिक रही है बाजार में ।
गरीबो की सोचने वालो की बस्तिया है यमुना के पार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
इन्साफ करने वाले ,गिने जाने लगे है सत्ता के यार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
नेता ,अभिनेता या हो वो न्याय रक्षक ,सब डूबे है सत्ता की खुमार में।।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।
 हम ,तुम भूखे नंगे सब ,हज़म हो जाते है एक डकार में ।।
देखो सत्ता बिक रही है बाजार में ।
 खरीदने वालो की संख्या है हज़ार में ।
देखो,सत्ता बिक रही है बाजार में ।।



-ऋषि राज